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सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत , जानिए पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

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मंगला गौरी के व्रत से जीवन में सुख और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। सावन में मंगला गौरी की पूजा करने से मनचाहा फल मिलता है। मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं। अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और मनचाहा वर मिलता है।

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सावन में मां मंगला गौरी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इस व्रत को करने से विवाह और दाम्पत्य जीवन की हर समस्या दूर हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कुंडली में मंगल दोष उत्पन्न हो रहा हो तो इस दिन की पूजा अत्यधिक लाभकारी होती है। यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए भी रखा जाता है। इस बार सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 03 अगस्त मंगलवार को पड़ रहा है.

मंगला गौरी व्रत का महत्व – मंगला गौरी का व्रत जीवन में समृद्धि और घर में सुख-समृद्धि लाता है. सावन में मंगला गौरी की पूजा करने से मनचाहा फल मिलता है। मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं। अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और मनचाहा वर मिलता है। संतान से संबंधित समस्याओं के लिए भी यह व्रत लाभकारी माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत करने की विधि- इस व्रत के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें। नित्य कर्म से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ, धुले या नए वस्त्र धारण कर व्रत करना चाहिए। इस व्रत में एक ही समय पर भोजन करने के बाद पूरे दिन देवी पार्वती की पूजा की जाती है। मां मंगला गौरी (पार्वती) की तस्वीर या मूर्ति लें। फिर इस मंत्र ‘मम पुत्रपुत्रसौभाग्यवृद्धे श्रीमंगलगौरीप्रीतिर्थं पंचवरप्यंतं मंगलगौरीव्रतः करिश्ये’ के साथ व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत में पूजन का शुभ मुहूर्त- अभिजीत मुहूर्त आज दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दोपहर 02:42 से दोपहर 03:35 तक विजय मुहूर्त होगा। ये दोनों समय पूजा के लिए शुभ हैं।

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