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35 बार असफलता हासिल करने पर पड़ोसियों ने उड़ाया था मजाक, IAS अधिकारी बनकर दिया सबको करारा जवाब

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हर व्यक्ति की कोई न कोई महत्वाकांक्षा या इच्छा होती है जैसे जब हम बच्चे थे तो बहुत सी चीजों को देखकर मोहित हो जाते थे और बड़े होकर हम उन्हें हासिल करना चाहते थे। कुछ सपने और आकांक्षाएं जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं वैसे-वैसे बरकरार रहते हैं और हम उन्हें हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। जीवन में एक सपना / लक्ष्य होना बहुत जरूरी है क्योंकि जब आप इसे अपने जीवन में हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे तभी आप इसे हासिल कर पाएंगे। अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर इंसान अपनी तरफ से लगातार कोशिश करता है, कोई इसमें सफल होता है तो कोई असफल।

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जो लोग अपने सपनों में असफल होते हैं वे फिर से प्रयास करते हैं, लेकिन जब वे बार-बार असफल होते हैं तो वे सपने देखना बंद कर देते हैं। आज हम जिसकी बात करने जा रहे हैं वह अपने सपने को सफल बनाने में लगातार असफल रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तो आइए जानते हैं आखिर कौन हैं वो लोग?

आज हम आपको जिस IPS अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उसकी कहानी उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो असफल होने पर हिम्मत हार जाते हैं। इस आईपीएस अधिकारी का नाम विजय वर्धन है।

विजय वर्धन जी को 35 बार फेल होने पर आईपीएस अधिकारी का पद मिला। उन्होंने जीवन में असफलताओं से दूर भागने की बजाय अपने लक्ष्य पर डटे रहने का फैसला किया। और आज एक IPS अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं। आज हम आपको विजय वर्धन के इस रोमांचक संघर्ष के बारे में बताने जा रहे हैं।

विजय वर्धन हरियाणा के सिरसा जिले में रहते हैं। विजय की प्रारंभिक शिक्षा सिरसा में हुई। उसने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए थे। बुनियादी शिक्षा पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए हिसार चले गए। वहां उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया। साल 2013 में इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने के बारे में सोचा।

विजय वर्धन यूपीएससी की परीक्षा में लगातार फेल हो रहे थे। फेल होने के कारण आस-पास रहने वाले लोगों ने भी उसके पास रहने की आस छोड़ दी थी। ज्यादातर लोग या तो उन पर हंसते थे या उन्हें परीक्षा छोड़ने की सलाह देते थे। लेकिन विजय ने किसी की नहीं सुनी, वह अपने प्रयास में लगा रहा। ऐसे ही दिन गुजरते जा रहे थे और साल 2018 में उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार उनका हाथ सफल रहा। यूपीएससी की परीक्षा में उन्होंने 104वीं रैंक हासिल की। इसी के साथ उन्हें आईपीएस का पद दिया गया। उसकी सफलता के बाद, उसके पड़ोसी और रिश्तेदार भी दंग रह गए जिन्होंने उसे परीक्षा छोड़ने की सलाह दी। विजय वर्धन की सफलता उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो एक या दो बार परीक्षा में असफल होने पर निराश हो जाते हैं।

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