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भारत के ऐसे प्रसिद्ध मंदिर जिनका रहस्य आज तक वैज्ञानिक भी नहीं खोज पाए

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सनातन धर्म में मंदिरों की परंपरा बहुत पुरानी है। ऐसे में आज देश में लाखों करोड़ों मंदिर हैं। भारत में बने इन मंदिरों में कई मंदिर आज भी एक रहस्य बने हुए हैं। दरअसल इनका रहस्य आज भी लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली है यानी ये मंदिर समझ से परे हैं.

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ऐसे में चाहे गढ़मुक्तेश्वर का प्राचीन गंगा मंदिर हो या टिटलागढ़ का रहस्यमयी शिव मंदिर या कांगड़ा का भैरव मंदिर. आइए जानते हैं क्या हैं इन मंदिरों के रहस्य, जिन्हें जानने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं।कानपुर जिले की घाटमपुर तहसील के बेहटा गांव में भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर है. इस मंदिर में मानसून आने के 15 दिन पहले से ही मंदिर की छत से पानी टपकने लगता है। इससे आसपास के लोगों को बारिश के आने का अंदाजा हो जाता है।

कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 5000 साल पुराना है। यहां भगवान जगन्नाथ बलदाऊ और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर में विराजमान हैं। इनके अलावा मंदिर में पद्मनाभम की मूर्ति भी स्थापित है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वर्षों से, वे जानते हैं कि मंदिर की छत से टपकती बूंदों से मानसून का आगमन होता है। कहा जाता है कि इस मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों के अनुसार बारिश भी होती है।

बूंदे कम गिरेंगी तो माना जा रहा है कि बारिश भी कम होगी। इसके विपरीत यदि वर्षा अधिक समय तक होती है तो यह माना जाता है कि बहुत अधिक वर्षा होगी। कहा जाता है कि कई बार वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों ने मंदिर से गिरने वाली बूंदों की जांच की। लेकिन इस रहस्य को सदियां बीत चुकी हैं, आज तक कोई नहीं जान पाया कि मंदिर की छत से टपकती बूंदों का रहस्य क्या है।

गढ़मुक्तेश्वर के प्राचीन गंगा मंदिर के रहस्य को आज तक नहीं समझा जा सका है। हर साल मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर एक अंकुर निकलता है। जब यह फट जाता है, तो भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की आकृतियाँ उभर आती हैं।

इस विषय पर काफी शोध कार्य भी हुए, लेकिन शिवलिंग पर अंकुर का रहस्य आज तक कोई नहीं समझ पाया है। इतना ही नहीं अगर मंदिर की सीढ़ियों पर पत्थर फेंका जाए तो पानी के अंदर पत्थर मारने जैसी आवाज सुनाई देती है। ऐसा लगता है जैसे मंदिर की सीढि़यां छूकर गंगा गुजर गई हो। ऐसा किस वजह से होता है ये आज तक कोई नहीं जान पाया है।

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